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भारत रत्न से सम्मानित माननीय प्रणव मुखर्जी जी को बधाईयां
By Deshwani | Publish Date: 9/8/2019 1:41:55 PM
भारत रत्न से सम्मानित माननीय प्रणव मुखर्जी जी को बधाईयां

नई दिल्ली। संगीता कुमारी। वर्तमान समय में देश की राजनीति में बहुत बदलाव आ गया है। पिछले कुछ वर्षों में छिपे अनेक चेहरों को मोदी सरकार में विशेष पद, प्रतिष्ठा व सम्मान मिला है। पक्ष‌-विपक्ष में भेदभाव ना करते हुए योग्यता को महत्व देना केंद्र सरकार का आत्मविश्वास और मजबूती दर्शाता है। निष्काम भाव से किये गये कर्मों का फल अंतोगत्वा देर-सवेर मिलता ही है। आज जब देश की राजनीति अपने चरम शिखर पर है तब राजनीति में सदभाव जैसी भावनायें यदा कदा देखने को मिल ही जाती हैं। ऐसी स्वच्छ भावनायें जन मानस को सकारात्मक संदेश देते हुए उनका राजनीति से गिरते हुए विश्वास को मजबूती से ऊपर उठाती है। 

 
दिनांक ०८-०८-२०१९ राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद जी ने भारत के तेरहवें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया। प्रणव दा ने अपने जीवन के पचास वर्ष देश की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में कार्यरत रहते हुए देश सेवा की। प्रणव दा जी का जन्म ११ दिसम्बर १९३५ पश्चिम बंगाल के मिराति गाँव में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविधालय से  राजनीति शास्त्र व इतिहास में एम.ए. करने के बाद वकालत की भी पढ़ाई पूरी की। प्रारम्भ में उन्होंने डिप्टी अकाउंट ऑफिस में अपर क्लर्क की नौकरी की। उसके बाद वह कलकत्ता के विद्यानगर कॉलेज में राजनीति शास्त्र के लेक्चरार बन गये। राजनीति शास्त्र पढ़ाते हुए ही उनका रुझान धीरे धीरे राजनीति की ओर मुड़ता गया जिस कारण उन्होंने पत्रकारिता भी की। आज से ठीक पचास वर्ष पूर्व १९६९ उन्होंने अपना राजनीति सफर प्रारम्भ किया। इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद वह राज्य सभा के सदस्य बन गये। अपनी कड़ी मेहनत के कारण वह शीघ्र ही पार्टी में मुख्य भूमिका अदा करने लगे। पूर्व प्रधानमंत्री  श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने उनकी योग्यता को देखते हुए उन्हें १९७८ में कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बना दिया था। इन्होंने पूरी निष्ठा की साथ कांग्रेस पार्टी में कार्य करते हुए देशहित को सर्वोपरि रखा। 
 
 
प्रणव दा कर्मठ व्यक्तित्व के धनी हैं। २००४ से २०१२ तक कांग्रेस पार्टी में रहते हुए इन्होंने तीन अहम पदों पर बहुत ही मन लगाकर कार्य किया। अपने राजनीतिक जीवन के लम्बे सफर में मिले हुए अनुभवों का भरपूर उपयोग किया। पहले दो वर्ष रक्षा मंत्री रहते हुए इन्होंने आतंकी मुद्दे पर रुस के साथ पहली बार एंटी टेरर वार गेम्स साझा किया। फिर तीन वर्ष विदेश मंत्री बनने के बाद दो वर्ष के लिये वित्त मंत्री का पद सम्भाले। 
 
सन २०१२ से २०१७ तक राष्ट्रपति पद पर आसीन रहे। एक तरफ कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार के कारण घिरी हुई है तब उसी में से उभरे बेदाग छवि के प्रणव दा को पूरे देश की जनता का अथाह आदर मिला हुआ है। वह सभी पार्टियों से ऊपर उठ चुके हैं। देश को उनके अनुभव की बहुत आवश्यकता है। उनके अनुभवों को मोदी सरकार समय समय पर सुझाव हेतु लेती रही है व आगे भी लेती रहेगी। ईश्वर उनके स्वास्थ्य पर अपनी कृपा बनाये रखें। प्रणव मुखर्जी जी को भारत रत्न प्राप्ति पर पुन: बहुत बहुत बधाई!! 
 
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