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कुशीनगर में बाढ़ से बेघर हुए परिवार दाने- दाने के मोहताज
By Deshwani | Publish Date: 20/8/2019 3:29:43 PM
कुशीनगर में बाढ़ से बेघर हुए परिवार दाने- दाने के मोहताज

कुशीनगर। जिले में बाढ़ ने 200 से अधिक परिवारों का घर-द्वार तो छीना ही, इन परिवारों को दाने-दाने के लिए मोहताज भी कर दिया। आठ वर्षों से बाढ़ से बेघर हुए इन परिवारों के करीब 600 लोग एपी बांध पर शरण लिए हुए हैं। प्लास्टिक तानकर जैसे-तैसे एक-एक दिन गुजार रहे हैं। आर्थिक तंगी इस कदर है कि परिवार के मुखिया अब भिक्षाटन करने को मजबूर हैं। 
 
कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में बड़ी गंडक नदी की धारा मौजूदा समय में अहिरौलीदान, बाघाचौर और विरवट कोन्हवलिया के एक दर्जन पुरवों से बिल्कुल सटकर बह रही है। वैसे तो यह नदी दशकों से अपना रौद्र रूप बारिश के समय में दिखाती रही है पर वर्ष 1998 और 2007 में भयंकर रौद्र रूप भी दिखा चुकी है। वर्ष 1998 के बाद नदी से सटे गांवों को बचाने के लिए तटबंध का निर्माण कराया गया था, जिसके बाद से लोग सुरक्षित जीवन गुजार रहे थे। वर्ष 2011 से नदी की धारा सुरक्षा के लिहाज से बनाए गए तटबंधों को चिरती हुई आबादी में घुसकर भारी पैमाने पर तबाही मचा रही है। 
 
इसके बाद से साल दर साल बड़े पैमाने पर लोगों के घर नदी में विलीन हो रहे हैं। शुरुआत से ही बड़ी गंडक नदी के निशाने पर अहिरौलीदान गांव रहा है। इस गांव के कई टोलों में कहर बरपाने के बाद नदी सैकड़ों परिवारों के घरों को अपनी आगोश में ले चुकी है। आर्थिक रुप से मजबूत लोग तो कहीं अन्य जगह पर मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगे लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पिछले आठ वर्षों से 200 से अधिक परिवारों के करीब 600 से अधिक लोग एपी बंधे पर शरण लिए हुए हैं। 
 
बाढ़ की विभिषिका से बेघर हुए लोगों की अगली पीढ़ी के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पीड़ित परिवारों के अधिकांश बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। अहिरौलीदान ग्राम सभा में स्कूल तो है, लेकिन बाढ़ पीड़ित यहां भी शरण लिए हुए हैं। स्कूल के कक्ष में पढ़ाई तो होती है, लेकिन पीड़ित परिवारों के बच्चे कक्ष में जाने की बजाय परिजनों की मदद करते हैं। 
 
भूख से बिलबिला रहे बाढ़ पीड़ितों के बीच जब कोई राहत सामग्री लेकर पहुंचता है तो पीड़ित परिवारों के लोग राहत सामग्री देख टूट पड़ते हैं। पीड़ितों की भूख के आगे राहत सामग्री भी कम पड़ जाती है। 
 
पिछले आठ वर्षों से एपी बांध पर शरण लिए 200 से अधिक परिवार आवासीय पट्टे की आश में प्रशासनिक अफसरों की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं। जब भी पीड़ितों की तरफ से किसी ने पट्टे की जमीन दिलाने की मांग की तो प्रशासनिक अफसरों द्वारा आश्वासनों की घूट्टी पिलाकर उन्हें शांत करा दिया जाता है। 
 
बाढ़ प्रभावित लोगों को आवासीय पट्टा दिलाने व बाढ़ से बचाव के लिए पिछले आठ वर्षों में तमाम आंदोलन हुए। क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू की अगुवाई में भी आंदोलन किया गया। अभी हाल ही में पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि गोरखनाथ यादव की अगुवाई में बाढ़ पीड़ित आवासीय पट्टे के लिए आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन को भी एसडीएम द्वारा आश्वासन देकर बीते रविवार को खत्म करा दिया गया। तमाम आंदोलन और शिकायती पत्र सौंपने के बाद भी पीड़ितों की तरफ अफसरों का ध्यान ही नहीं है। यही वजह है कि बाढ़ पीड़ित खानाबदोश की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। 
 
अहिरौलीदान के नोनियापट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला व खैरखूटा के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लोग बंधे पर रहने को मजबूर हैं। जब बांध की तरफ नदी रुख करती है तो पीड़ित पुराने मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। वर्ष 2017 व 2018 में सर्वाधिक नुकसान का सामना कचहरी टोला व खैरखूटा के लोगों को करना पड़ा था। इन दो टोलों में नदी ने भारी पैमाने पर तबाही मचाकर टोले के अस्तित्व को ही तहस-नहस कर दिया। इस बार भी इन्हीं टोलों में नदी कहर बरपा रही है। 
 
हाल ही के दिनों में एपी बांध पर रहने वाले दो दर्जन से अधिक परिवारों को सिंचाई विभाग द्वारा नोटिस जारी कर जगह खाली करने की हिदायत दी गई थी। दरअसल सिंचाई विभाग ने अतिक्रमण की लिहाज से इन परिवारों को नोटिस दिया था। तमाम विरोध व प्रशासनिक अफसरों के हस्तक्षेप के बाद मामला नरम पड़ गया। 
 
अरविन्द कुमार, एसडीएम तमकुहीराज  ने बताया कि पीड़ितों में कुछ लोगों को पहले ही पट्टा दिया जा चुका है। शेष बचे पीड़ितों की सूची तैयार करायी जा रही है। इन्हें भी पट्टे पर भूमि मुहैया कराकर विस्थापित कराये जाने की प्रक्रिया चल रही है।
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