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हिमाचल और उत्तराखंड में भीषण बारिश से अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत, कई लापता
By Deshwani | Publish Date: 20/8/2019 11:00:18 AM
हिमाचल और उत्तराखंड में भीषण बारिश से अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत, कई लापता

नई दिल्ली। इस महीने के शुरूआत में देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों मे कहर बरपाने के बाद बारिश ने अब उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में डेरा डाल दिया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले दो दिनों में हुई रिकॉर्ड बारिश से उत्पन्न हालात के चलते अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा कई लोग लापता हैं। जम्मू-कश्मीर में तवी नदी में फंसे दो लोगों और हरियाणा के करनाल में एक परिवार के नौ लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से बचा लिया गया। 
 
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पहाड़ों से मलबा आने के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश में मणिमहेश यात्रा स्थगित कर दी गई है। इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है, क्योंकि यमुना, गंगा और अन्य नदियां या तो खतरे के निशान के काफी करीब बह रही हैं या फिर उसे पार कर गई हैं। 
 
हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान वर्षा जनित विभिन्न घटनाओं में राज्य में 22 लोगों की मौत हुई है और एक युवती लापता है। सोमवार सुबह हमीरपुर जिला के लोअर हरेटा में स्कूल जाते तीन अध्यापक और एक छात्र खड्ड पार करते समय बह गए, जिन्हें ग्रामीणों ने  बड़ी मुश्किल से बचाया। हमीरपुर जिला में सुबह से मूसलाधार बारिश हो रही है। राज्य में सर्वाधिक 10 लोगों की मौत शिमला जिले में हुई है। सोलन में पांच की जान गई। चम्बा और कुल्लू में दो-दो तथा सिरमौर, लाहौल-स्पीति और  बिलासपुर में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। मरने वालों में 15 पुरुष, चार बच्चे और तीन महिलाएं हैं। राज्य में शनिवार और रविवार को व्यापक बारिश ने पिछले आठ सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। शिमला, कुल्लू, बिलासपुर और सिरमौर जिलों में भारी वर्षा के मद्देनजर सोमवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखा गया है।
 
शिमला के उपनगर संजोली के सिमिट्री में एक मकान पर मलबा व पत्थर गिरने से कमरे में सो रहे सात मजदूर हादसे में चोटिल हुए। इनमें बिहार के कृष्णागंज के मूल निवासी शाह आलम  नामक एक मजदूर  ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। शिमला की ठियोग तहसील में उफनती खड्ड को पार कर रही मां व बेटी सैलाब में बह गईं। दोनों नेपाली मूल की थीं और मजदूरी करती थीं। पुलिस ने 53 वर्षीय महिला जयवंती के शव को क्यारतु नामक स्थान पर बरामद कर लिया, जबकि उसकी बेटी गंगा अभी तक लापता है।
 
करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र बिंदु मणिमहेश यात्रा पर बरसात हावी हो गई है। बारिश की वजह से नदी और नालों के ऊफान पर आने से यात्रा पूरी करने के तमाम रास्तों पर भूस्खलन होने से बंद पड़ गए हैं। बहरहाल, जान माल का कोई नुकसान न हो, इसलिए मणिमहेश यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। बाकायदा मणिमहेश ट्रस्ट की ओर से उपमंडल प्रशासन के माध्यम से एक अधिसूचना जारी कर मणिमहेश यात्रा स्थगित होने का उल्लेख किया गया है। 
 
जन्माष्टमी से राधाष्टमी तक चलने वाली इस मणिमहेश यात्रा को लेकर हर बार लाखों की तादाद में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचकर डल में डूबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं। अधिकारिक तौर पर तो इस बार भी मणिमहेश यात्रा जन्माष्टमी से शुरु होगी और राधाष्टमी को खत्म होगी लेकिन भोले शंकर के दर्शनाभिलाषी उनके भक्त अभी से मणिमहेश की ओर कूच किए जा रहे हैं। एडीएम पीपी सिंह ने भी मणिमहेश यात्रा के स्थगित होने की पुष्टि की है। 
 
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रविवार को बादल फटने से अबतक दस लोगों की मौत हो चुकी है और छह लोग घायल हैं। इनमें से सोमवार सुबह चार लोगों को देहरादून लाया गया। दो अन्य लोगों को मोरी में भर्ती काराया गया हैं। छह से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मौसम विभाग ने कुमाऊं मंडल में अगले 24 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके लिए अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार सुबह लगभग 11 बजे तक उत्तरकाशी के आराकोट और माकुड़ी से दस लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान और शिनाख्त का काम जारी है। बादल फटने से लगभग नौ गांव प्रभावित हुए हैं।
 
उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। उफनाई गंगा नगर की हृदय स्थली त्रिवेणी घाट का आरती स्थल जलमग्न हो गया है। घाट पर बनी सुरक्षा पुलिस चौकी बह गई है। चंद्रेश्वर नगर में रह रहे गंगा किनारे लोगों के मकानों में पानी घुस गया है। सूचना पर पहुंची आपदा प्रबंधन की टीम ने 11 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है तथा बाकी लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थान पर चले जाने की चेतावनी दी है। 
 
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन के कारण सोमवार को तीन घंटे बंद रहने के बाद एक बार फिर यातायात के लिए खोल दिया गया है। सोमवार को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उधमपुर में भारी बारिश के कारण खेरी पस्सी क्षेत्र के पास भूस्खलन के कारण पहाड़ी पर से भारी मात्रा में पत्थर तथा मलबा कटकर राजमार्ग पर आ गिरा। सीमा सड़क संगठन के कर्मचारियों तथा मशीनों ने मार्ग पर से मलबे को हटाने का कार्य शुरू किया और तीन घंटे की मशक्कत के बाद राजमार्ग साफ होते ही वहां बड़ी संख्या में फंसे वाहनों को आगे की ओर जाने की अनुमति दे दी गई। उधर, सोमवार दोपहर तवी नदी में बाढ़ के पानी में फंसे दो लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू कर बचाया गया। 
 
यमुना नदी में अचानक पानी बढ़ने के कारण करनाल जिले के इंद्री इलाके के गांव गढ़पुर टापू के रहने वाले एक परिवार के नौ सदस्यों को एक जोखिम भरे ऑपरेशन के तहत हेलीकॉप्टर द्वारा एयरलिफ्ट कर बचाया गया। यह परिवार यमुना नदी के बीच छप्पर बनाकर रह रहा था और पानी में फंस गया। इसकी जानकारी रविवार देर रात पता चली । चूंकि पानी ज्यादा था और अंधेरा हो गया था, इसलिए आईआरबी के जवानों द्वारा नाव से बचाव का प्रयास किया गया लेकिन असफल रहा।
 
इसके बाद मुख्य सचिव के सहयोग से सहारनपुर के सरसावा में वायु सेना स्टेशन से संपर्क किया। परिवार के सदस्यों में से एक के पास मोबाइल फोन था, जिससे मोबाइल टावरों की मदद से सटीक स्थान की जानकारी मिल सकी। फंसे हुए परिवार के सभी सदस्यों को रात में लगभग 2:45 बजे एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर द्वारा एयरलिफ्ट किया गया। खराब मौसम, रात की स्थिति और परिवार के अनिश्चित स्थान को देखते हुए यह एक जोखिम भरा ऑपरेशन था। परिवार अत्यधिक संकट में था क्योंकि पानी 4 फुट ऊंचा हो गया था और बचाव दल के पहुंचने तक उन्हें खुद को बचाने  के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ा। 
 
पहाड़ी राज्यों से असीमित मात्रा में आ रहे बारिश के पानी से पैदा हुए बाढ़ के हालात से बचने के लिए पंजाब ने सोमवार को सतलुज नदी के जरिये पाकिस्तान में 40,000 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। पाकिस्तान की ओर ये पानी फिरोजपुर के हुसैनीवाला हेड से छोड़ा गया है, जहां पर सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी सुबह से ही स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आज सुबह तक भाखड़ा डैम का जलस्तर अपनी क्षमता 1680 फुट को पार कर गया था और जलस्तर 3.86 फुट की वृद्वि के साथ 1680.80 फुट हो गया था। गुजरे 24 घण्टे में जल की आवक 1,30,936 क्यूसेक दर्ज की गई है। 
 
उत्तर भारत के ऊपरी इलाकों में बारिश होने के कारण से दिल्ली यमुना नदी में पानी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने की वजह से निचले इलाकों में जलभराव होने का खतरा बना गया है। दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान (चेतावनी स्तर 204.50 मीटर पर) से ऊपर हो गया है। हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से 8.28 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से दिल्ली में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अगले दो दिन दिल्ली के लिए बेहद मुश्किल भरे बताते हुए यमुना के आसपास बसे लोगों को जगह खाली कर प्रशासन द्वारा बनाए गए शिविरों में जाने की सलाह दी है। 
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