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कौन है शिव, सावन में क्यों होती है इनकी पूजा?
By Deshwani | Publish Date: 13/8/2019 6:23:59 PM
कौन है शिव, सावन में क्यों होती है इनकी पूजा?

 श्री गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के आचार्य शिवेन्द्र पाण्डेय जी के अनुसार शिव कौन है इनकी पूजा करने से क्या प्राप्त होता है


    'तव तत्वं न जानामि,कीदृशो$सि महेश्वरः ।
       यादृशो$सि महादेव, तादृशाय नमो नमः ।।' 

    कौन हैं शिव...??  
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"शिव" संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है, कल्याणकारी या शुभकारी।  यजुर्वेद में शिव को शांतिदाता बताया गया है। 'शि' का अर्थ है, पापों का नाश करने वाला, जबकि 'व' का अर्थ देने वाला यानी दाता। 

      क्या है शिवलिंग...???
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 शिव की दो काया है। एक वह, जो स्थूल रूप से व्यक्त किया जाए, दूसरी वह, जो सूक्ष्म रूपी अव्यक्त लिंग के रूप में जानी जाती है। शिव की सबसे ज्यादा पूजा लिंग रूपी पत्थर के रूप में ही की जाती है।  लिंग शब्द को लेकर बहुत भ्रम होता है। संस्कृत में लिंग का अर्थ है चिह्न। इसी अर्थ में यह शिवलिंग के लिए इस्तेमाल होता है।  शिवलिंग का अर्थ है : शिव यानी परमपुरुष का प्रकृति के साथ समन्वित-चिह्न। शिव, शंकर,महादेव.... शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं - शिव शंकर भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। वस्तुतः, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। 
 
 
 शिव ने सृष्टि की स्थापना, पालना और विनाश के लिए क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और महेश (महेश भी शंकर का ही नाम है) नामक तीन सूक्ष्म देवताओं की रचना की है। इस तरह शिव ब्रह्मांड के रचयिता हुए और शंकर उनकी एक रचना। भगवान शिव को इसीलिए महादेव भी कहा जाता है।
 
 
शिव को अर्द्धनारीश्वर भी कहा गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव आधे पुरुष ही हैं या उनमें संपूर्णता नहीं।  वास्तव में, यह शिव ही हैं, जो आधे होते हुए भी पूरे हैं। इस सृष्टि के आधार और रचयिता यानी स्त्री-पुरुष शिव और शक्ति के ही स्वरूप हैं। इनके मिलन और सृजन से यह संसार संचालित और संतुलित है। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। नारी प्रकृति है और नर पुरुष। प्रकृति के बिना पुरुष बेकार है और पुरुष के बिना प्रकृति। दोनों का अन्योन्याश्रय संबंध है। अर्धनारीश्वर शिव इसी पारस्परिकता के प्रतीक हैं।
 
 
सावन में शिव का पूजन कई प्रकार से किया जाता है शास्त्रों में शिव की प्रसन्नता के लिए जलादि धारा(अभिषेक) से पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। जिसमे दूध से पुत्र और सर्वसिद्धि, दही से पशुधन वृद्धि और क्लेशनाश, घी से ऐश्वर्य तथा भौतिक सुख, मधु से धन-धान्य वृद्धि और मेधा प्राप्ति, शक्कर से शांति एवं लक्ष्मी प्राप्ति, गन्नांरस से व्यापार वृद्धि एवं तरक्की, भांगरस से खुशी तथा आत्मविश्वास में वृद्धि, बेलरस से रोग - विकार शांति, दूर्वा रस से वंशवृद्धि, कुशरस से ब्याधि शांति, आंवला एवं सर्वोषधि रस से निरोगिता एवं ओज प्राप्ति, वर्षाजल से अभिष्टसिद्धि प्राप्ति, होती है। सावन मास में रूद्राभिषेक कराने से शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।और भक्तों के मनवांछित फल को प्रदान करते हैं।
     तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु
           हर हर महादेव

 
श्री गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र
आचार्य शिवेन्द्र पाण्डेय
बेतिया, पश्चिम चम्पारण, बिहार
 
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