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आपातकाल के 44 साल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- 'लोकतंत्र के लिए संघर्ष करनेवाले नायकों को सलाम'
By Deshwani | Publish Date: 25/6/2019 3:03:52 PM
आपातकाल के 44 साल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- 'लोकतंत्र के लिए संघर्ष करनेवाले नायकों को सलाम'

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज आपातकाल के 44 साल पूरे होने के मौके पर "उन सभी महानुभावों" को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने 1970 के दशक में तत्कालीन इंदिरा गांधी शासन द्वारा लगाए गए आपातकाल का निडर होकर विरोध किया था। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट संदेश में लिखा, "भारत उन सभी महानुभावों को सलाम करता है, जिन्होंने आपातकाल का जमकर विरोध किया था। भारत की लोकतांत्रिक नैतिकता एक सत्तावादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक हावी रही।" 

 
मोदी ने वीडियो संदेश में कहा, लोकतंत्र में आपातकाल में क्या कुछ जुल्म नहीं हुए। इससे बड़ी धमकियां क्या होती हैं लेकिन यह देश झुका नहीं था। 25 जून,1975 वह एक ऐसी काली रात थी जो कोई भी लोकतंत्र प्रेमी और भारतवासी भुला नहीं सकता। एक प्रकार से देश को जेलखाने में बदल दिया गया था, विरोधी स्वर को दबा दिया गया था।
 
 
पीेएम मोदी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण सहित देश के गणमान्य नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया था। न्याय व्यवस्था भी आपातकाल के उन भयावह रूप से बच नहीं पाई थी। अखबारों को पूरी तरह बेकार कर दिया गया था। आज के पत्रकारिता जगत के विद्यार्थी, लोकतंत्र में काम करने वाले लोग उन काले कालखंड को बार-बार स्मरण करके भी लोकतंत्र के प्रति जागरुकता बढ़ाने के निरंतर प्रयास करते रहे हैं और करते भी रहने चाहिए। लोकतंत्र के प्रति नित्य जागरुकता जरूरी होती है, इसलिए लोकतंत्र को आघात करने वाली बातों को भी स्मरण करना होता है। साथ ही लोकतंत्र की अच्छी बातों की दिशा में आगे बढ़ना होता है।
 
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट संदेश में लिखा, 'वर्ष 1975 में, आज के दिन निहित राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा की गई आपातकाल की घोषणा, भारत के महान लोकतंत्र पर काला धब्बा है। मैं नमन करता हूँ, उन सत्याग्रहियों को जिन्होंने मजबूती से इस अंधकार में लोकतंत्र की आग को जलाए रखा था।'
 
केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा प्रमुख अमित शाह ने ट्वीट किया, '1975 में आज ही के दिन मात्र अपने राजनीतिक हितों के लिए देश के लोकतंत्र की हत्या की गई। देशवासियों से उनके मूलभूत अधिकार छीन लिए गए, अखबारों पर ताले लगा दिए गए। लाखों राष्ट्रभक्तों ने लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने के लिए अनेकों यातनाएं सहीं। मैं उन सभी सेनानियों को नमन करता हूं।'
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