राष्ट्रीय
देश के सबसे बड़े दूसरे बैंक पीएनबी में 11,500 करोड़ की धोखाधड़ी
By Deshwani | Publish Date: 14/2/2018 6:14:58 PM
देश के सबसे बड़े दूसरे बैंक पीएनबी में 11,500 करोड़ की धोखाधड़ी

मुंबर्इ। देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े दूसरे बड़े पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में गलत लेन-देन का मामला प्रकाश में आया है। इस बैंक में करीब 11,500 करोड़ रुपये की अनाधिकृत लेन-देन उजागर हुआ है। बैंक ने शेयर बाजार को बताया कि बैंक के मुंबई की एक शाखा में 1771.7 अरब डॉलर यानी करीब 11,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आयी है। बताया जा रहा है कि इस धोखाधड़ी का असर कुछ दूसरे बैंकों पर भी देखने को मिल सकता है। इस खबर के बाद पंजाब नेशनल बैंक के शेयर में बुधवार को करीब 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है।
 
उधर, पंजाब नेशनल बैंक ने ज्वैलरी डिजाइनर नीरव मोदी के धोखाधड़ी मामले से जुड़े 10 अफसरों को सस्पेंड कर दिया है। अभी हाल ही में सीबीआर्इ ने नीरव मोदी, उसके भार्इ निशाल मोदी और पीएनबी अधिकारियों पर करीब 280.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया था।
 
पंजाब नेशनल बैंक की और से जारी एक पत्र के मुताबिक, उक्त लेन-देन कुछ चुनिंदा खाता धारकों की सहमति से उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए हुए थे। साथ ही, इस लेन-देन के आधार पर दूसरे बैंकों ने इन ग्राहकों को विदेश में अग्रिम राशि का हस्तांतरण किया। हालांकि, बैंक ने इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन मामला जांच एजेंसियों को भेज दिया गया है। बैंक के मुताबिक, इस मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं. फिलहाल, इस मामले की जांच जारी है।
 
क्या कहते हैं पुराने आंकड़े
सरकारी आंकड़े यह बताते हैं कि बट्टा खाते में डाली जाने वाली राशि 5 साल की अवधि में तीन गुना तक बढ़ गयी है। वित्त वर्ष 2012-13 में सरकारी बैंकों का कुल बट्टा खाता 27,231 करोड़ रुपये था. इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2013-14 में सरकारी बैंकों ने 34,409 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टे खाते डाला था। वित्त वर्ष 2014-15 में यह राशि बढ़कर 49,018 करोड़ रुपये और 2015-16 में 57,585 करोड़ रुपये हो गयी। इससे पहले वित्त वर्ष 2016-17 में बैंकों के बट्टे खाते में कुल मिलाकर 81,683 करोड़ रुपये की राशि डाली गयी थी।
 
बट्टे खाते में डाले गये हजारों करोड़ रुपये
इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष (2017-18) में सितंबर की छमाही तक सरकारी बैंकों ने 53,625 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डाले गये। हालांकि, सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक एसबीआर्इ ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में 20,339 करोड़ रुपये से अधिक का फंसा हुआ कर्ज बट्टे खाते में डाला है। यह आंकड़े तब के हैं, जब  एसबीआर्इ में उसके सहयोगी बैंकों का विलय नहीं किया गया था। पंजाब नेशनल बैंक ने वित्त वर्ष 2016-17 में 9,205 करोड़ रुपये बट्टे खाते डाले हैं। अन्य बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया ने 7,346 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 5,545 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4,348 करोड़ रुपये बट्टे खाते डाले हैं।
 
बैंक को लगा 280.70 करोड़ रुपये का चूना
पीएनबी के एक आला अधिकारी ने कहा कि सीबीआई द्वारा हाल ही में अरबपति जौहरी ​नीरव मोदी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना भी इसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक को 280.70 करोड़ रुपये का कथित चूना लगाये जाने के मामले में नीरव मोदी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. अधिकारियों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने बैंकों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस मामले में खामियों को दूर करने के लिए अग्रसक्रिय रुख अपनाएं. ऐसे में आने वाले दिनों में धोखाधड़ी के ऐसे और मामलों का खुलासा होने की संभावना जतायी जा रही है।
 
संदिग्ध खातों की हो रही जांच-पड़ताल
अधिकारियों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने 24 जनवरी को बैंकों को सुधार एजेंडा वितरित किया है। इसमें उनसे कहा गया है कि वे संदिग्ध खातों की जांच पड़ताल करें. एजेंडा में धोखाधड़ी को बिलकुल सहन नहीं करते हुए ‘धोखेबाजों’ के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गयी है. बैंकों को यहां तक कहा गया है कि उचित आधार होने पर पर अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई से पीछे नहीं हटें। इसके साथ ही, बैंकों से कहा गया है कि वे उन खातों पर नियमित रूप से निगाह रखें, जो अधिक मूल्य के हैं और जिनका उल्लेख किया गया है. एजेंडे में बैंकों से कहा गया है कि वे विशेष टीम के जरिए वसूली प्रयासों पर जोर दें।
सीबीआई को मिलीं दो शिकायतें
सीबीआई को करीब 11,500 करोड़ रूपये के संदिग्ध लेनदेन के बारे में डिजाइनर नीरव मोदी तथा एक ज्वेलरी कंपनी के खिलाफ पीएनबी से दो शिकायतें मिलीं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एजेंसी को संदिग्ध लेन-देन के बारे में शिकायतें मिलीं। इस संदिग्ध लेन-देन का पता सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने लगाया था। उन्होंने बताया कि संदिग्ध लेन-देन बैंकों की शाखाओं से किये जाने की शिकायतें मिलीं और यह लेन-देन 10,000 करोड़ रूपये से अधिक का था।
 
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