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उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने में समाज का सहयोग जरूरी: राष्ट्रपति
By Deshwani | Publish Date: 14/1/2018 6:05:41 PM
उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने में समाज का सहयोग जरूरी: राष्ट्रपति

नई दिल्ली (हि.स.)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा है कि उद्यमशीलता के जरिये आर्थिक लोकतन्त्र को मजबूत बनाने का यह काम केवल सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने में समाज का सहयोग आवश्यक है। परिवारों, शिक्षण संस्थानों, निजी क्षेत्र के बैंकों और उद्यमियों, गैर-सरकारी संस्थाओं, मीडिया आदि सभी को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना है, जहां निजी कारोबार को अधिक सम्मान से देखा जाए। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के समारोह में उद्यमशीलता के द्वारा आर्थिक लोकतन्त्र विषय पर आयोजित समारोह में आह्वान किया कि नौजवानों के उद्यमों को सहायता देने के लिए ‘प्रबोधिनी’ और ‘डिक्की’ जैसे संस्थान, कुछ बड़े औद्योगिक समुदाय तथा सरकार आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि परिवारों, शिक्षण संस्थानों, निजी क्षेत्र के बैंकों और उद्यमियों, गैर-सरकारी संस्थाओं, मीडिया आदि सभी को मिल कर एक ऐसा माहौल बनाना है जहां निजी कारोबार को अधिक सम्मान से देखा जाए।
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि आर्थिक लोकतन्त्र की दिशा में सबसे बुनियादी काम, जन-धन योजना के रूप में हुआ है क्योंकि बैंक में खाता होना आर्थिक लोकतन्त्र में भागीदारी की पहली सीढ़ी है। जन-धन योजना के तहत, तीस करोड़ से अधिक लोगों ने अपने खाते खोले हैं। इनमे 52 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में मुद्रा-योजना, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और अनुसूचित जाति के उद्यमियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। वंचित वर्गों के नौजवानों को इन कार्यक्रमों का लाभ लेना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि नौजवानों के उद्यमों को सहायता देने के लिए ‘प्रबोधिनी’ और ‘डिक्की’ जैसे संस्थान, कुछ बड़े औद्योगिक समुदाय तथा सरकार आगे आए हैं। केंद्र सरकार और सार्वजनिक उद्यमों की कुल खरीद का 4 प्रति अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमियों से लिया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। 
आर्थिक और सामाजिक अधिकारों, नीतियों और अवसरों का उपयोग करने के लिए लोगों को जागरूक बनाना चुनौती भरा काम है। पीड़ित-शोषित-वंचित वर्गों को उनके विकास के लिए खुले हुए रास्तों के बारे में बताना और उन रास्तों पर चलने के लिए प्रेरित करना देश के हित में ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि देश में ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘सबका सम्मान, सबका उत्थान’ के विचारों पर आधारित अनेक कार्यक्रम लागू किए गए हैं। ये सभी कार्यक्रम आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में अलग-अलग अभियान है।
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