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नेपाल
नेपाल में वामपंथी गठबंधन की बनेगी सरकार
By Deshwani | Publish Date: 13/12/2017 3:21:42 PM
नेपाल में वामपंथी गठबंधन की बनेगी सरकार

काठमांडू, (हि.स.)। नेपाल में सीपीएन-यूएमएल और सीपीएन-माओवादी सेंटर के गठबंधन को करीब दो तिहाई बहुमत मिल गया, लेकिन दोनों दल संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के तहत अगले साल जनवरी के मध्य में मिलकर सरकार बनाएंगे। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।

चूंकि गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों ने पार्टी के एकीकरण की जगह सरकार के गठन को प्राथमिकता दी है, इसलिए वे संविधान के अनुच्छेद 76 (2) का अनुसरण करेंगे।

संविधान के इस अनुच्छेद के प्रावधानों के अनुसार, अगर संसद की प्रतिनिधिसभा में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला है तो इस स्थिति में राष्ट्रपति किसी ऐसे संसद सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे जिसको सदन में दो या अधिक दलों का समर्थन प्राप्त है।

समाचार पत्र हिमालयन टाइम्स के अनुसार, नेपाल में मतगणना लगभग पूरी हो चुकी है। सीपीएन-यूएमएल 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि उसके सहयोगी वाम पार्टी सीपीएन-माओवादी सेंटर को 36 सीटों पर सफलता मिली है। नेपाल की सत्ताधारी और संसद निवर्तमान संसद में सबसे बड़ी पार्टी रही नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 22 सीटें मिली हैं। मधेशी पार्टियों को 21 सीटों पर सफलता मिली है और छह सीटें अन्य को मिली हैं। 

विदित हो कि प्रतिनिधि सभा की 110 सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत मतदान हुआ था और इन सीटों की भीमतगणना पूरी हो चुकी है। हालांकि आनुपातिक मतों की गणना में भी सीपीएन -यूएमएल को सबसे अधिक मत मिले हैं। लेकिन कांग्रेस को उससे सिर्फ 90 हजार मत कम मिले हैं और वह दूसरी सबसे पार्टी के रूप में उभरी है। 

आनुपातिक मतों की गिनती के हिसाब से प्रतिनिधिसभा में नेपाली कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़कर 60 से 65 होने की उम्मीद है, जबकि सीपीएन -यूएमएल की सीटें 120 से 125, सीपीएन-माओवादी सेंटर की सीटें 50 से 55 होने की संभावना है। इससे साफ हो गया है कि सीपीएन-यूएमएल अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है, क्योंकि उसके पास सरकार बनाने के 138 सदस्यों का जादुई आंकड़ा नहीं है। 

उल्लेखनीय है कि अगर पार्टियां सरकार बनाने से पहले विलय करती हैं तो उसे संविधान के अनुच्छेद 76 (1) के तहत एक पार्टी के रूप में 138 सदस्यों के साथ बहुमत सिद्ध करना होगा।

सीपीएन - माओवादी सेंटर के नेता नारायण काली श्रेष्ठ ने कहा कि दो वाम दलों के नेता अगले साल जनवरी के मध्य में नई सरकार के गठन के लिए राजी हैं और इसके बाद विलय के प्रयास किए जाएंगे। ऐसा माना जा रहा है कि संसद के उच्च सदन के चुनाव से पहले सरकार का गठन हो जाएगा।

 
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