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झारखंड
जेएसएससी की कार्यशैली सवालिया घेरे में
By Deshwani | Publish Date: 13/12/2017 7:39:23 PM
जेएसएससी की कार्यशैली सवालिया घेरे में

हजारीबाग, (हि.स.) । झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की कार्यशैली को लेकर लगातार विवाद उठता रहा है। कभी सीट से अधिक काउंसलिंग को लेकर तो कभी काउंसलिंग के बाद मेरिट लिस्ट जारी करने को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। यही कारण है ही आयोग द्वारा की गई नियुक्तियों पर भ्रष्टाचार होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। पिछले महीने राज्य में हाई स्कूल के लिए विभिन्न विषयों के लिए 17 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर परीक्षाएं आयोजित की गईं। करीब 10 दिन पूर्व आयोग द्वारा इन परीक्षाओं की उत्तर सीट भी जारी कर दी गई। संभावना जतायी जा रही है कि जल्द ही सफल अभ्यर्थियों की सूची जारी की जा सकती है। आयोग द्वारा जारी किए जाने वाली सूची को लेकर ही अभ्यर्थियों में कुंठा और क्षोभ की स्थिति है। उन्हें आशंका है कि पूर्व की तरह ही इस बार भी आयोग सफल अभ्यर्थियों की सूची जारी करेगा, लेकिन मेरिट लिस्ट शायद ही जारी करे। 

इसी वर्ष +2 विद्यालयों के लिए इतिहास, भौतिकी एवं रसायन शास्त्र विषयों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की गई। आयोग ने परीक्षाफल तो जारी किया लेकिन परीक्षाफल के साथ मेरिट लिस्ट जारी नहीं की। और तो और तीनों विषयों में सीट से अधिक अभ्यर्थियों की काउंसलिंग करवा ली गई। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में जहां केवल प्रमाण पत्रों की जांच की जानी रहती है, वहां प्रथम चरण में केवल निर्धारित सीट की संख्या तक ही काउंसलिंग की जाती है और शेष को प्रतीक्षा सूची में डालकर रिक्त सीट रहने पर मौका दिए जाने का प्रावधान रहता है लेकिन इस प्रक्रिया का आयोग ने उल्लंघन किया। काउंसलिंग में प्रमाणपत्रों की जांच के बाद भी अंतिम सूची में सारे अभ्यर्थी समाहित नहीं किए गए। यह अलग बात है कि परीक्षाफल जारी किए जाने एवं काउंसलिंग के लिए आमंत्रित किए जाने के समय अपने बचाव में आयोग ने यह सूचना डाली कि काउंसलिंग अभ्यर्थी के चयन की गारंटी नहीं है। ऐसा कर आयोग मामले को न्यायालय में ले जाए जाने से मुक्त हो गया, लेकिन काउंसलिंग होने के बाद भी मेरिट लिस्ट नहीं जारी किए जाने पर सवाल उठने के बाद आयोग ने कटआफ जारी किया। इसी गलत प्रक्रिया के कारण उपरोक्त नियुक्ति में भ्रष्टाचार एवं पहुंच के बल पर चयन होने के आरोप लगे। 

हाई स्कूल के अभ्यर्थियों का मानना है कि मेरिट लिस्ट के साथ ही रिजल्ट जारी किया जाना चाहिए, ताकि न केवल नियुक्ति में पारदर्शिता की दलील दी जाए बल्कि प्रारंभ से परीक्षाफल प्रकाशन के साथ ही पारदर्शिता का संदेश अभ्यर्थियों व आम जनता के बीच जाए।

पिछले 11 दिसम्बर से +2 उच्च विद्यालयों में विभिन्न विषयों के लिए 3080 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रपत्र भरने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। नियुक्ति के पूर्व के अनुभवों को देखते हुए सरकार को चाहिए था कि इसमें अपेक्षित बदलाव करे, ताकि सभी सीटों को भरना सुनिश्चित किया जा सके। इसी वर्ष +2 उच्च विद्यालयों के लिए इतिहास, भौतिकी एवं रसायन शास्त्र विषयों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की गई। तीनों विषयों में 171-171 पद भरे जाने थे लेकिन अंतिम तौर पर केवल 355 सीट ही भरी जा सकी। इतिहास में करीब करीब, लेकिन रसायन शास्त्र में 56 और भौतिकी में तो मात्र 76 पद ही भरे जा सके। बताया गया कि ऐसा नियुक्ति नियमावली में विसंगति के कारण हुआ। निर्धारित पदों में से आधे हाई स्कूल में कार्यरत शिक्षकों द्वारा भरा जाने का प्रावधान है, लेकिन परीक्षा के बाद हाई स्कूल शिक्षकों से उतने अभ्यर्थी सफल ही नहीं हुए। इस बार भी इससे इतर स्थिति की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ऐसे में +2 उच्च विद्यालयों के शिक्षकों के करीब आधे पद रिक्त रह सकते हैं। सरकार सभी सीटों को भरने के लिए नियुक्ति नियमावली में परिवर्तन कर हाई स्कूल के शिक्षक पद से भरे जाने वाले सीट के खाली रहने पर सीधे अभ्यर्थियों से भरे जाने का प्रावधान कर सभी सीटों को भरना सुनिश्चित कर सकती है।

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