ब्रेकिंग न्यूज़
नामकुम के पास भयंकर सड़क हादसा, बोलेरो-ट्रक की टक्‍कर में 7 लोगों की मौततीन चरणों में नहीं खुलेगा भाजपा का खाता: अखिलेश यादवआप-कांग्रेस में गंठबंधन को लेकर नहीं बनी बात, सिसोदिया ने कही ये बातफिल्म यारियां की एक्ट्रेस एवलिन शर्मा को याद आए पुराने दिन, शेयर की ये तस्वीरेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने म्यूलर जांच रिपोर्ट को पूर्णतया असत्य और निराधार बतायासुपौल में राहुल ने पीएम पर जमकर साधा निशाना, कहा- चौकीदार को ड्यूटी से हटाने वाली है जनताफारबिसगंज में बोले प्रधानमंत्री मोदी, जनता की तपस्या को विकास कर लौटाऊंगाबेकार गई राणा और रसेल की पारी, बेंगलुरु ने 10 रन से जीता रोमांचक मुकाबला
अंतरराष्ट्रीय
विमान रखरखाव के अलावा छोटे मानवरहित विमान के निर्माण तकनीक पर विचार कर रहे हैं भारत-अमेरिका: पेंटागन
By Deshwani | Publish Date: 16/3/2019 4:27:24 PM
विमान रखरखाव के अलावा छोटे मानवरहित विमान के निर्माण तकनीक पर विचार कर रहे हैं भारत-अमेरिका: पेंटागन

वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका ने विमान रखरखाव के अलावा छोटे मानवरहित विमान और हल्के एवं छोटे आयुध बनाने की तकनीक संबंधी परियोजना को दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के लिए चिह्नित किया है। पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। 

 
अमेरिका का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के रक्षा अधिकारियों ने हाल में यहां रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) वार्ता की थी। भारत-अमेरिका डीटीटीआई बैठक में दोनों देशों में उद्योगों को मिलकर काम करने और अगली पीढ़ी की तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
 
 
'एक्वीजीशन एंड सस्टेनमेंट' के लिए अमेरिका की सहायक रक्षा मंत्री एलेन लॉर्ड ने शुक्रवार को पेंटागन में मीडिया से कहा, 'हम जिस एक परियोजना पर विचार कर रहे हैं, वह छोटे मानवरहित विमान को लेकर है।' लार्ड ने रक्षा उत्पादन सचिव अजय कुमार के साथ बैठक की सह अध्यक्षता की। ड्रोन को लेकर मुख्य रूप से वार्ता अमेरिकी वायुसेना अनुसंधान प्रयोगशाला और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के बीच हो रही है।
 
 
दोनों पक्ष अप्रैल में तकनीकी योजना संबंधी दस्तावेज तैयार करेंगे। उन्होंने कहा, 'हम सितंबर में इस पर हस्ताक्षर की योजना बना रहे हैं।' उन्होंने कहा कि इस सह विकास में भारतीय उद्योग को शामिल किए जाने की संभावना है। लार्ड ने कहा, 'हम चाहते हैं कि अमेरिकी और भारतीय तकनीक को साथ लेकर उन्हें युद्ध में लड़ने की क्षमता के तौर पर विकसित किया जाए जिसका प्रयोग भारत और अमेरिका दोनों कर सकें। इससे अमेरिका और भारत दोनों को लाभ होगा।' अगली बैठक सितंबर में भारत में होगी।
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS