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शाबाशी के दो शब्द आपके बच्चे का जीवन बदल सकते हैं- हरिओम शर्मा ‘हरि’
By Deshwani | Publish Date: 27/1/2018 5:51:22 PM

आज कुछ बच्चे हिंसक होते जा रहे हैं, उनकी सहनशक्ति जवाब दे रही है। माता-पिता की जरा सी डांट से अथवा स्कूल में मनचाही सफलता न मिलने पर आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। कई बार दूसरे की हत्या करने जैसा अपराध भी कर रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में स्कूल, घर व समाज के वातावरण पर चिन्तन, मनन व मंथन करना जरूरी हो गया है।

विद्यालयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वालों की हमेशा ही वाह-वाह होती रही है। लेकिन सर्वोच्च अंक किसी एक को ही मिल सकता है। इसलिए सामान्य बच्चे इस वाह-वाह से हमेशा ही वंचित रह जाते हैं। तकरीबन यही स्थिति सामान्य बच्चों की समाज व घर में भी होती है। अधिकांश माता-पिता दूसरे के बच्चों की तुलना अपने बच्चों से करते हैं, यहाँ तक कि माता-पिता ऐसे शब्दों का प्रयोग भी करते हैं जो बच्चों के दिलों दिमाग में बैठ जाता है। मैंने कई ऐसे अभिभावकों को अपने बच्चों से कहते सुना है कि फलां के बच्चे के 88 फीसदी अंक आये और एक तुम हो कि 78 फीसदी पर ही लटक गये। क्या करोगे जिन्दगी में? भूखे मरोगे आदि-आदि। अब ऐसे अभिभावकों को कौन समझाये कि अपमानित करने की जगह प्रशंसा के दो शब्द बोल देते तो आपका बच्चा 88 प्रतिशत नहीं, 98 प्रतिशत ला सकता है। फिर प्रशंसा में कंजूसी क्यों? अभिभावक यह भी कह सकते हैं कि शाबाश मेरे बेटे! तुमने अच्छी मेहनत की, अगली बार थोड़ी और कोशिश करना, तो अंक और भी ज्यादा आएंगे। शाबाशी के दो शब्द ही आपके बच्चे के जीवन को बदलने के लिये काफी हैं। लेकिन शर्त यह है कि आप अपने बच्चे द्वारा किये गये कार्यों की समय-समय पर समीक्षा भी करते रहें साथ ही बच्चे द्वारा किये जा रहे कुछ क्रियाकलाप अगर आपको उचित न लगें तो भी बच्चे को डांटे नहीं, बल्कि और अधिक प्यार से बच्चे को समझायें।
मान लीजिए कि आपके बच्चे ने परीक्षा में कम अंक प्राप्त किये हैं और आप उन अंकों से संतुष्ट नही हैं। आपको लगता है कि आपके बच्चे के अंक और अधिक आने चाहिये तो उसका एक ही उपाय है शाबाशी। हर वक्त की डांट-डपट से बच्चा और अधिक बिगड़ जाता है, ढीठ हो जाता है, पढ़ाई से जी चुराने लगता है। आप जितना ही बच्चे को डांटेंगे, प्रताड़ित करेंगे, अपमानित करेंगे, बच्चा उतना ही बिगड़ता जाएगा। एक दिन ऐसा आयेगा जबकि बच्चा आपके हाथ से निकल जाएगा और आप हाथ मलते रह जाएंगे। इसके विपरीत आप जिस तेजी से बच्चे की तारीफ करेंगे उसको शाबाशी देंगे उससे भी दुगुनी तेजी से बच्चा अपने कार्य में रुचि लेने लगेगा और उसका मनोबल बढ़ जायेगा। वह आपका और अधिक सम्मान करने लगेगा, आपको अपना आदर्श मानने लगेगा, प्यार के ये दो शब्द उसको इतना बल प्रदान कर देंगे कि वह कठिन से कठिन कार्य करने में भी आनन्दित होगा, अपने कर्तव्य के पथ पर दिन प्रतिदिन अग्रसर होता जायेगा, अपने लक्ष्य को प्राप्त कर आपका नाम जग में रोशन करेगा।
कुछ अभिभावक अपने अहम् की सन्तुष्टि के लिए भी बच्चे को बेवजह डांटते रहते हैं, बात बात में तुम बच्चे को अपमानजनक विशेषणों से अलंकृत करते रहते हैं। ऐसे अभिभावक अपने अहम् का परित्याग करें। वे अपने बच्चों को विशेषणों से अलंकृत अवश्य करें किन्तु उन विशेषणों की भाषा अपमानजनक न होकर सम्मानजनक होनी चाहिए, उसे प्रोत्साहित करने वाली होनी चाहिए। सच मानिए इन विशेषणों से आपका लाडला एक दिन आपका और अपने देश का नाम रोशन अवश्य कर देगा।
बड़ा सवाल तो ये है कि आप प्रशंसा करने से क्यों डरते हैं? आप शाबाशी देने में क्यों कंजूसी करते हैं? क्या आपको भय है कि आपकी शाबाशी से कहीं बच्चा बिगड़ न जाये। यदि आपकी यही सोच है तो आपकी सोच सही नहीं है। अपनी सोच को बदल डालिए, और दिल खोलकर बच्चे को शाबाशी दीजिये। उसको अच्छे-अच्छे विशेषणों से अलंकृत करिए, फिर देखिये आपके बच्चे की सोच कैसे बदल जाती है। उसके सोचने का तरीका, उसके चलने का तरीका, उसके बातचीत का तरीका सबकुछ बदल जाएगा। उसके व्यक्तित्व में ऐसा निखार आ जाएगा कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेंगे। तो क्या आप नहीं चाहते कि आपका बच्चा महान बने और आपके नाम को रोशन करे। आप गर्व से कह सकें कि अमुक बच्चा मेरा बेटा है। अगर आप चाहते हैं कि आपका मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाए तो आज से ही अपने बच्चों को अपमानित करना छोड़कर प्रोत्साहित करना शुरू कर दीजिए। उसके द्वारा किये गये छोटे-छोटे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करनी शुरु कर दीजिये, बात-बात पर बच्चे की पीठ थपथपाना शुरु कीजिए। सच मानिए इन छोटी-छोटी से बातों से ही आप बन जाएंगे सफल माता-पिता।


 

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