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छपरा में सास-बहू सम्मेलन में महिलाओं को दी गयी परिवार नियोजन की जानकारी
By Deshwani | Publish Date: 7/12/2019 4:22:26 PM
छपरा में सास-बहू सम्मेलन में महिलाओं को दी गयी परिवार नियोजन की जानकारी

छपरा परिवार नियोजन पर अलख जगाने की नई पहल की गयी है। सास एवं बहू के माध्यम से परिवार नियोजन पर जागरूकता फैलाई जा रही है। जिले के लहलादपुर प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों पर सास-बहू सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें आने वाली सास-बहू की जोड़ियों को परिवार नियोजन के स्थाई तथा अस्थाई साधनों के बारे में जानकारी दी गयी तथा साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।  सास-बहू सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के टीम के द्वारा सास-बहू के जोड़ियों के साथ खेल खेला गया। जिसमें सास-बहू की जोड़ियों ने काना-फूसी की। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि काना-फूसी व परिवार नियोजन के बारे में अफवाहों पर ध्यान न दें। बल्कि आशा या एएनएम के द्वारा बताये गये परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल करें। इस मौके पर लहलादपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बाबूलाल प्रसाद, केयर इंडिया के बीएम रंजन कुमार, बीएचएम  वाहिद अख्तर, नर्स निभा कुमारी, आशा मूर्ति देवी,सेविका सुनिता कुमारी शामिल थी।

 
परिवार नियोजन के इन साधनों पर हुई चर्चा: 
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बाबूलाल प्रसाद ने परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधनों के बारे में जानकारी दी । स्थायी साधनों में महिला नसबंदी एवं पुरुष नसबंदी एवं अस्थायी साधनों में कॉपर टी, गर्भ-निरोधक गोली(माला-एम एवं माला-एन), कंडोम एवं इमरजेंसी कंट्रासेपटीव पिल्स के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि नवीन गर्भनिरोधक ‘अंतरा एवं ‘छाया’ के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया जा रहा है। ‘अंतरा’ गर्भ निरोधक इंजेक्शन का इस्तेमाल एक या दो बच्चों के बाद गर्भ में अंतर रखने के लिए दिया जाता है। साल में इंजेक्शन का चार डोज दिया जाता है। वहीं ‘छाया’ गर्भ निरोधक एक साप्ताहिक टेबलेट है।
 
 
बैलून के माध्यम से दी संदेश:
केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक प्रेमा कुमारी ने बताया कि  सास-बहू सम्मेलन के दौरान सास और बहू को चार पांच बैलून गोद में दिया जाता है और उसे संभालकर रखने को कहा जाता है। लेकिन चार पांच में से एक-दो बैलून हाथ से छूट कर गिर जाता है। फिर एक जोड़ी सास-बहू को दो बैलून दिया जाता है जिसे वे असानी से पकड़ लेती हैं और नीचे नहीं गिरता है।  जिससे यह संदेश दिया जाता है कि अगर ऐसे हीं चार पांच बच्चे होंगे तो संभालना मुश्किल होगा। इससे आर्थिक स्थिति भी खराब होगी। दो बच्चों को बाद परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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