ब्रेकिंग न्यूज़
समस्तीपुर : मिथिलांचल को मिला तोहफा, जयनगर से भागलपुर तक जायगी स्पेशल ट्रेनमहिन्द्र फर्स्ट च्वाइस के मालिक मोतिहारी के पीपराकोठी में अपने ही स्कॉर्पियो में गोली लगने से घायल मिले, हुई मौतइसबार मोतिहारी की पुलिस रही मुस्तैद तो लूट नहीं सके सवा लाख रुपए, आर्म्स के साथ दबोचे गए तीनइंटरसिटी और लोकल ट्रेन का संचालन नहीं होने से यात्रियों को हो रही काफी परेशानी, रामगढ़वा में भाजपा सांसद का पुतला दहन कर स्थानीय ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शनकेंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कर्नाटक के बेंगलुरु में तीन अलग-अलग प्रकल्पों का लोकार्पण कियाभारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिग्गज अभिनेता और निर्देशक बिस्वजीत चटर्जी को 51वें भारतीय व्यक्तित्व पुरस्कार से किया गया सम्मानितभारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रक्सौल के दो केन्द्रों पर कोविड वैक्सीनेशन अभियान हुआ प्रारंभरक्सौल: सिमुलतला विद्यालय में ईशान ने मारी बाजी
राष्ट्रीय
राष्‍ट्रपति ने कहा- भारतीयता ही जे एन यू की पहचान है और इसे लगातार मजबूत किया जाना चाहिए
By Deshwani | Publish Date: 19/11/2020 12:21:32 PM
राष्‍ट्रपति ने कहा- भारतीयता ही जे एन यू की पहचान है और इसे लगातार मजबूत किया जाना चाहिए

दिल्ली राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय- जेएनयू जैसे शिक्षा संस्‍थानों को छात्रों के लिए बेहतर समन्‍वय विकसित करने और नई-नई पहलों को बढ़ावा देने के काम में सबसे आगे रहना चाहिए।वीडियो संदेश के माध्‍यम से जे एन यू के चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि देश के हर हिस्‍से और समाज के हर तबके से छात्र जे एन यू में उत्‍कृष्‍टता के लिए बराबरी के अवसर वाले माहौल में पढ़ने के लिए आते हैं। उन्‍होंने कहा कि जे एन यू भारतीय संस्‍कृति के सभी रंगों का परिचायक है और यहां के भवनों, छात्रावासों, सडकों और परिसर में मिलने वाली सुविधाओं के नामकरण के पीछे भारत की विरासत हैं। यह विश्‍वविद्यालय भारत की सांस्‍कृतिक और भौगोलिक पहचान को सर्वश्रेष्‍ठ रूप में प्रस्‍तुत करता है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीयता ही जे एन यू की पहचान है और इसे लगातार मजबूत किया जाना चाहिए। 

  
 
 
 
उन्‍होंने प्राचीन भारत के शिक्षा के वैभवशाली अतीत और अनुसंधान का उल्‍लेख किया और कहा कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए हम तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्‍लभी जैसे प्राचीन विश्‍वविद्यालयों से प्रेरणा ले सकते हैं जहां अनुसंधान और शिक्षा के बडे ऊंचे मानदंड रखे गए थे। राष्‍ट्रपति ने कहा कि इन शिक्षा केन्‍द्रों में विशिष्‍ट ज्ञान की प्राप्ति के लिए विश्‍वभर से छात्र और शोधकर्ता आते थे। उन्‍होंने भारत के विद्वानों से आग्रह किया कि वे ज्ञान का एक ऐसा मौलिक संस्‍थान तैयार करे जो आज कि वैश्विक समस्‍याओं का निदान कर सके। उन्‍होंने कहा क जे एन यू उच्‍च शिक्षा का ऐसा ही एक केन्‍द्र है जो अपनी उत्‍कृष्‍टता पूरे विश्‍व को दे सकता है। 
   
 
 
 
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉक्‍टर रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने में किसी भी विश्‍वविद्यालय की भूमिका बहुमत महत्‍वपूर्ण होती है। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता जाहिर की कि पिछले पांच साल से शोध को संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए जे एन यू ने राष्‍ट्रीय शैक्षणिक वरीयता ढांचे में अच्‍छी उपलब्धि हासिल की है। उन्‍होंने कहा कि इस साल भी इस वरीयता सूची में विश्‍वविद्यालय का दूसरा स्‍थान है और यह उच्च शिक्षा वित्‍त पोषण एजेंसी के साथ अनुसंधान सुविधाओं को बढावा देने के लिए सार्थक प्रयास कर रहा है। इसका बजट 455 करोड़ रूपए है।
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS