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बेतिया
लॉकडाउन: किसानों को गन्ना आपूर्ति का अविलंब भुगतान कराये सरकार : किसान महासभा
By Deshwani | Publish Date: 30/3/2020 6:56:00 AM
लॉकडाउन: किसानों को गन्ना आपूर्ति का अविलंब भुगतान कराये सरकार : किसान महासभा

बेतिया।अवधेश कुमार शर्मा। कोरोना संकट से बचाव को लेकर सरकार ने पूरे भारत में "लॉक डाउन" का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन में किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की उम्मीद रही, लेकिन किसानों के लिए प्रवचन के अलावा कुछ नहीं साबित हुआ। किसानों की गाढ़ी कमाई का हजारों करोड़ रुपए पश्चिम चम्पारण जिला के विभिन्न  चीनी मिलों ने दबाकर रखा है।

चीनी मील को केन एक्ट के तहत बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन में कर देना है, यदि ऐसा नहीं तो डिलेयड पेमेन्ट एक्ट अन्तर्गत ब्याज समेत भुगतान किया जाना चाहिए। अलबत्ता सरकार या प्रशासन किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं दिला रही है। डिलेयड पेमेन्ट एक्ट के अनुपालन तो सरकार व प्रशासन के वश की बात नहीं, वह तो सिर्फ न्यायालय ही दिला सकता है।

लेकिन कोर्ट का चक्कर लगाने की जहमत कोई उठाने को तैयार नहीं है। पूरा देश कोरोना कोविड 19 वायरस से बचाव को लेकर "लॉक डाउन" का अनुपालन कर रहा है, किसान गन्ना के खेत मे है, जान हथेली पर लेकर गन्ना की आपूर्ति चीनी मील को करता है। ऐसे में नीतीश सरकार को चाहिए कि किसानों के बकाया मूल्य का भुगतान अविलंब करने का निर्देश चीनी मिलों को देना चाहिए।

अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला संयोजक सुनील कुमार राव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि अब चीनी मीलों का गन्ना पेराई सत्र समाप्त होने को है। मझौलिया  समेत कई चीनी मीले बंद हो चुकी है। मील प्रबंधन अभी दिसंबर माह में आपूर्ति की गयी, गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर सका है। किसान गन्ना मूल्य के भुगतान की प्रतीक्षा में हैं, इस संकट की घड़ी में उनकी गाढ़ी कमाई की राशि नही मिलने से गन्ना की खेती किसी काम की नहीं रह गई है।

"लॉक डाउन" की स्थिति में किसान घरों से भी नहीं निकल पा रहे हैं। चीनी मील प्रबन्धन अब "कोरोना" की वज़ह से चीनी नहीं बिकने की बात बता कर जिम्मेदारी से भाग रहा है। "लॉक डाउन"को लेकर किसान आवाज़ उठा नही सकता, वैसे कोई किसानों की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है। सांसद, विधायक, मंत्री तक कोई चीनी मील के विरुद्ध मुंह नहीं खोलते, नरकटियागंज के विधायक ने विधानसभा में जमकर मील की बखिया उधेड़ा, अलबत्ता हालात नही बदले।

उल्लेखनीय है कि गन्ना की खेती किसानों के लिए अंग्रेजों के नील की खेती जैसी अमानवीय, कष्टदायक व असीमित पीड़ादायक खेती जैसी हो गई है। किसानों की वर्षभर की कमाई की राशि संकट की घड़ी, बीमारी, बच्चों की शिक्षा, बेटे-बेटियों के विवाह, नामांकन व श्राद्धकर्म के काम नहीं आ पाती है। ऐसे में अखिल भारतीय किसान महासभा ने मांग किया है कि नीतीश सरकार  किसानों का गन्ना मूल्य का भुगतान केन एक्ट के अनुसार पंन्द्रह दिनों से अधिक होने पर ब्याज के साथ कराने की गारंटी करें।

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