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एक बार फिर अमेरिकन अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप के धमाकों से गूंज उठी पोकरण फायरिंग रेंज
By Deshwani | Publish Date: 14/8/2019 2:54:15 PM
एक बार फिर अमेरिकन अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप के धमाकों से गूंज उठी पोकरण फायरिंग रेंज

जोधपुर। पोकरण फायरिंग रेंज एक बार फिर आज अमेरिका में बनी अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप के धमाकों से गूंज उठा।  अमेरिकन अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर 155 एम 777 के ए-2 एडवांस वर्जन की 6 तोप के भारत में पहुंचने के बाद इनका फायरिंग टेस्ट जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेन्ज में किया जा रहा है। यह परीक्षण अगले कुछ दिन तक जारी रहेंगे।

 
चालीस किलोमीटर दूर तक मार करने की क्षमता वाली इन अमेरिकन तोपों के इस साल के आखिर तक भारतीय सेना में शामिल होने की संभावना है। अमेरिका से इन तोपों की आपूर्ति शुरू हो गई है। हाल ही अमेरिका से आईं छह नई तोपों का आज पोकरण में परीक्षण करके लंबी दूरी तक की मारक क्षमता को परखा गया है जिनकी गूंज से फायरिंग रेंज गूंज उठा। 
 
परीक्षण के समय अमेरिकन विशेषज्ञों के साथ ही अमेरिकी कंपनी की भारत में सहयोगी महेन्द्रा कंपनी के अधिकारी व उच्च सैन्यधिकारी भी मौजूद हैं। इसके अलावा सेना के तोपखाना यूनिट के अधिकारी, अमेरिका सरकार के प्रतिनिधि, अमेरिकन गन कंपनी बीएई सिस्टम के प्रतिनिधि सहित कई विशेषज्ञ तोपों की क्षमता का आकलन कर रहे हैं।
 
सूत्रों ने बताया कि इस तोप की खासियत यह हैं कि ये हल्की होने के कारण इसे उठा कर या फील्ड कर हेलिकॉप्टर के जरिये या अन्य किसी साधनो से एक से दूसरे स्थानों पर रखा जा सका हैं। खासकर जम्मू कश्मीर के लेह लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश के 16000 फीट से भी ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर के जरिये इन्हें ऊंचे स्थानों पर ले जाया जा सकता हैं। 
 
भारतीय सेना की मारक क्षमता को मजबूत करने व आधुनिकीकरण की कड़ी में अमेरिका के साथ एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप खरीदने का समझौता हुआ था। इस कड़ी में दो अमेरिकन तोप 18 मई 2017 को भारत लाई गई थी। 8 जून को इसके पहले फायर ट्रायल पोकरण में शुरू किये गये थे।
 
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि यह लंबी प्रक्रिया है। अमेरिकन गन कंपनी बीएलई सिस्टम के भारत में महिन्द्रा डीएलएस पाटर्नर हैं यह दोनों मिलकर भारत में तोप बनाएंगे। 3 सालों में कुल 145 तोप भारतीय सेना को मिलने की संभावना है। इसे चीन व पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात किया जायेगा। इस तरह साल 1986 में बोफोर्स तोप के बाद अब सेना को एक कारगर तोप मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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